हेलो दोस्तों आप सबका स्वागत है हमारे इस आर्टिकल में और आज हम युवा सहकार योजना 2025 के बारे में बात करेंगे, पूरी जानकारी जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।
युवा सहकार योजना 2025: किसानों के लिए एक नई उम्मीद
युवा सहकार-सहकारी उद्यम समर्थन एवं नवाचार योजना’ (Yuva Sahakar-Cooperative Enterprise Support and Innovation Scheme) भारत सरकार द्वारा सहकारी क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। युवा सहकार योजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा किया जाता है, जो सहकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक सांविधिक निगम है।
युवा सहकार योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि:
भारत में सहकारी आंदोलन का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसने कृषि, दुग्ध उत्पादन, क्रेडिट और उपभोक्ता सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, समय के साथ, सहकारी समितियों में युवाओं की भागीदारी में कमी देखी गई, जिससे इस क्षेत्र में नवाचार और ऊर्जा की कमी महसूस की गई। इस चुनौती का सामना करने और सहकारी क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘युवा सहकार’ योजना की शुरुआत की गई। इसका मुख्य उद्देश्य नए और अभिनव विचारों के साथ नवगठित सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करना है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज के आर्थिक विकास में योगदान दे सकें।
युवा सहकार योजना मुख्य विशेषताएं:
1. लक्ष्य समूह: यह योजना विशेष रूप से उन सहकारी समितियों के लिए है जो कम से कम तीन महीने से परिचालन में हैं और जिनके पास नए और अभिनव विचार हैं। यह युवाओं को सहकारी उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे वे सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों में शामिल हो सकें।
2. वित्तीय सहायता: योजना के तहत प्रदान किया गया ऋण दीर्घकालिक होता है, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक हो सकती है। एनसीडीसी परियोजना गतिविधियों के लिए सावधि ऋण पर लागू ब्याज दर पर 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान करता है, जिससे सहकारी समितियों की वित्तीय कम होती है।
3. अन्य योजनाओं के साथ समन्वय: इस योजना के तहत ऋण को भारत सरकार की अन्य योजनाओं के तहत उपलब्ध सब्सिडी के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे सहकारी समितियों को अधिकतम लाभ मिल सके। यह समन्वित दृष्टिकोण सहकारी समितियों की स्थिरता और सफलता में सहायक होता है।
4. विशेष प्रावधान: महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति, पूर्वोत्तर क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों की सहकारी समितियों के लिए परियोजना लागत का 80% तक वित्तपोषण उपलब्ध है, जबकि अन्य के लिए यह 70% तक है। यह प्रावधान सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित करने में सहायक है।
5. ब्याज दर और अधिस्थगन: तीन करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के लिए, एनसीडीसी की प्रचलित सावधि ऋण ब्याज दर से 2% कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध है, साथ ही मूलधन के भुगतान पर दो वर्ष तक का अधिस्थगन (मोरेटोरियम) दिया जाता है। यह सुविधा सहकारी समितियों को अपनी परियोजनाओं को स्थिरता से संचालित करने में मदद करती है।
युवा सहकार योजना के लाभ:
1. युवाओं की भागीदारी: यह योजना युवाओं को सहकारी आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है, जिससे वे सामूहिक उद्यमिता के माध्यम से रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में योगदान दे सकते हैं।
2. नवाचार को बढ़ावा: नए और अभिनव विचारों को प्रोत्साहित करके, यह योजना सहकारी क्षेत्र में नवीन समाधानों और प्रक्रियाओं के विकास को बढ़ावा देती है, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होती है।
3. वित्तीय सशक्तिकरण: उदार वित्तीय सहायता और अनुकूल शर्तों के माध्यम से, यह योजना सहकारी समितियों को अपनी परियोजनाओं को सफलतापूर्वक कार्यान्वित करने में सक्षम बनाती है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होती है।
4. समावेशी विकास: विशेष श्रेणियों के लिए उच्च वित्तपोषण और अनुदान प्रावधानों के माध्यम से, यह योजना समाज के सभी वर्गों को आर्थिक विकास की मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास करती है।
युवा सहकार योजना एनसीडीसी की भूमिका:
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की स्थापना 1963 में संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। यह सहकारी समितियों के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली शीर्ष संस्था है। एनसीडीसी कृषि, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, आयात-निर्यात और अन्य सहकारी गतिविधियों में वित्तीय सहायता प्रदान करती है। ‘युवा सहकार’ योजना एनसीडीसी की प्रमुख पहलों में से एक है, जो सहकारी क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
युवा सहकार योजना, हालिया प्रगति और आंकड़े:
वित्तीय वर्ष 2023-24 में, ‘युवा सहकार’ योजना के तहत विभिन्न राज्यों में सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में 41.91 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई, जिसमें से 23.91 लाख रुपये जारी किए गए। इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल में 70 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत और जारी की गई। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना के माध्यम से विभिन्न राज्यों में सहकारी समितियों को सशक्त किया जा रहा है।