हेलो दोस्तों आप सबका स्वागत है हमारे इस आर्टिकल में और आज हम डेयरी उद्यमिता विकास योजना 2025 के बारे में बात करेंगे, पूरी जानकारी जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना 2025:
भारत के गांवों में आज भी बड़ी संख्या में लोग खेती और पशुपालन के जरिए अपनी जिंदगी चलाते हैं। खासतौर पर डेयरी यानी दूध से जुड़ा व्यवसाय, छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों की आमदनी का अहम हिस्सा है। लेकिन अक्सर यह देखा गया है कि उन्हें सही साधन, जानकारी और वित्तीय मदद नहीं मिल पाती। इसी कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने डेयरी उद्यमिता विकास योजना (Dairy Entrepreneurship Development Scheme – DEDS) शुरू की थी, जिसे अब 2025 तक और भी मजबूत और कारगर बनाने की दिशा में काम हो रहा है।
डेयरी क्षेत्र की अहमियत
भारत दूध उत्पादन में दुनिया में नंबर एक है, लेकिन इसके पीछे लाखों छोटे किसान और पशुपालक हैं जो दिन-रात मेहनत करते हैं। इनके पास सीमित संसाधन होते हैं—अच्छी नस्ल के जानवर, दाना-पानी, चिकित्सा सुविधा या दूध को सही तरीके से बेचने की व्यवस्था। इस वजह से वे अपनी आय बढ़ाने में अक्सर असफल हो जाते हैं। डेयरी उद्यमिता विकास योजना इन्हीं लोगों को केंद्र में रखकर बनाई गई है।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना का उद्देश्य और शुरुआत
यह डेयरी उद्यमिता विकास योजना सबसे पहले 2010 में NABARD (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) द्वारा शुरू की गई थी। इसका मकसद था कि छोटे किसानों और पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने या बढ़ाने के लिए सब्सिडी और आसान ऋण की सुविधा दी जाए। साथ ही, इससे गांवों में रोजगार बढ़े और दूध की गुणवत्ता व मात्रा में भी सुधार हो।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना 2025 के लिए नया रूप
- 2025 के लिए इस डेयरी उद्यमिता विकास योजना में कई बदलाव और सुधार किए गए हैं ताकि यह ज्यादा लोगों तक पहुंचे और ज्यादा उपयोगी हो।
- अब आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है, जिससे पारदर्शिता और सरलता बढ़ी है।
- महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए विशेष सब्सिडी दी जा रही है।
- उन्नत नस्लों के दुधारू पशु पालने के लिए अतिरिक्त मदद दी जा रही है।
- मशीन मिल्किंग और दूध प्रोसेसिंग यूनिट जैसे आधुनिक संसाधनों के लिए भी अनुदान उपलब्ध है।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना की प्रमुख बातें
- सामान्य किसानों को 25% और महिलाओं/SC/ST वर्ग को 33.33% तक की सब्सिडी मिलती है।
- 2 से 10 दुधारू पशु पालने तक की यूनिट शुरू करने के लिए योजना के तहत सहायता दी जाती है।
- दूध संग्रहण, प्रोसेसिंग, शीतगृह (cold storage) और पैकेजिंग जैसे कामों पर भी अनुदान मिलता है।
- योजना का फायदा सिर्फ वही ले सकता है जो पहले इससे सब्सिडी नहीं ले चुका हो।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना कि जरूरी शर्तें
- आवेदक की उम्र 18 साल होनी चाहिए।
- किसी राष्ट्रीयकृत, ग्रामीण या सहकारी बैंक से ऋण लेना जरूरी है।
- लाभार्थी को योजना से जुड़ी ट्रेनिंग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना के प्रमुख घटक
- मिनी डेयरी यूनिट – 2 से 10 पशु पालने के लिए सब्सिडी के साथ यूनिट लगाई जा सकती है।
- दूध संग्रहण केंद्र – गांवों में दूध इकट्ठा करने के लिए कलेक्शन सेंटर।
- प्रोसेसिंग यूनिट – दूध को प्रोसेस करने, पैक करने और ब्रांडिंग के लिए सहायता।
- फीड मैनेजमेंट और स्वचालन – जानवरों के खानपान और देखभाल के लिए आधुनिक मशीनों पर मदद।
- शीतगृह और कोल्ड चेन – दूध को ताजगी के साथ रखने और पहुंचाने की व्यवस्था।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना 2025 तक के लक्ष्य
- 5 लाख से ज्यादा किसानों को योजना से जोड़ना।
- 50 हजार से अधिक महिला उद्यमियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना।
- देश भर में 1,000 से ज्यादा दूध प्रोसेसिंग और संग्रहण केंद्र बनाना।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना से होने वाले फायदे
- गांवों में स्व-रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- दूध की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार होगा।
- ग्रामीण महिलाएं ज्यादा आत्मनिर्भर बनेंगी।
- दूध और उससे बने उत्पादों का बाजार और निर्यात भी बढ़ेगा।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना कि चुनौतियाँ और कठिनाइयाँ
- कई किसानों को योजना के बारे में जानकारी ही नहीं होती।
- बैंक से लोन लेने में पेपरवर्क और समय की परेशानी आती है।
- कुछ इलाकों में प्रशिक्षण की कमी है, जिससे योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
- दूध की कीमत तय करने में पारदर्शिता की कमी भी एक मुद्दा है।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना सरकार की नई पहलें
- योजना के प्रचार के लिए मोबाइल वैन और कैंप चलाए जा रहे हैं।
- टोल फ्री किसान कॉल सेंटर के जरिए जरूरी जानकारी दी जा रही है।
- ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए योजना में आवेदन आसान बनाया गया है।
- महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।